कृष्णा विरह में राधा

कृष्णा विरह में राधा

तुम जो ना कहो कान्हा, हम वह सब पढ़ लेंगे,

हम आँखों ही आँखों में दिल के सारे जज़्बात समझ लेंगे |

 

हरकत जो करो तुम, अगन दिल में लगती हैं,

मुस्कराहट हो तुम्हारी, सांस हमारी चलती हैं |

 

बहुत मुश्किल हैं दिल की तमन्नाओं को होंठो पर लाना,

पर उससे भी मुश्किल हैं, इन्हें सीने में दबाना |

 

इस बार आओ तो सिर्फ जताने के लिए मत आना,

दिल में चिंगारी लगाने के लिए मत आना |

 

दिल से जुड़े तमाम सवालों के जवाब संग लाना,

क्या तुम भी उतना ही तड़पते हो,

जिस प्रकार सुलग रही हूँ मैं ‘ तुम्हारी राधा ‘ |

 

~आरती रावत

 

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Aarti Rawat
Feelings come and go like clouds in a windy sky. Conscious breathing is my anchor.

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