एक वो मेरा गाँव ही था

एक वो मेरा गाँव ही था

एक वो मेरा गाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था

वही शांति का मंदिर
वही इंसानियत की मज़्जिद
वही निर्मलता का दरबार
वही मेहनत और सच्चाई की नाव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था

प्रकृति अभी ज़िंदा है
खेतों में फसल अभी उम्दा है
नदी और पहाड़ के बीच दुनिया समेटे ,
वो एक सुंदरता का भाव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था

बैलों की घंटी सुनाई देती है
पढ़ने जाते उन बच्चों की निश्छल मुस्कान दिखाई देती है
खाट पे सोए किसान के चहरे पर मेहनत का वो भाव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था

मटकी और कुल्हड़ का स्वच्छ पानी
ममता और अनुभव समेटे मेरी दादी और नानी
हर होली हर दिवाली गरीबी में ही सही,
गरीबी में भी वह अपनत्व की छाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था

खुशाल पंछियों की आवाज़
गम में भी सच्चे रिश्तों की मिठास
दुल्हन के घूंघट में संस्कारों को समेटे
वो इस जहाँ के समंदर की नाव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था
एक वो मेरा गाँव ही था 

~वैष्णवी सोनी (तनू )

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Vaishnavi Soni
A+student+of+mechanical+engineering+in+The+LNM+Institute+of+Information+Technology%2C+I+am+interested+in+politics+and+administration+as+well+as+in+literature.+A+Travel+lover%2C+like+to+draw+and+watch+movies.

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