Mera Rasta

Mera Rasta

मेरे शाम और मेरे सहर
रूह को जकड़ती तन्हाई का ये कहर
और नाजाने इस दास्ताँ-ए-जिंदगी का कौन सा पहर
जिस में तुम आके भी नहीं आयी
लहरा के भी नहीं छायी
गुनगुना के सारे मेरे दिल के धुन
नज़्म-ए-मोहब्बत बयां ना कर पाई

तुम्हे शायद ये मेरी फितरत गवारा नहीं
तुम्हारी नज़रों में मैं बेगैरत आवारा सही
पर यह आवारगी मेरे नसीब की लकीर नहीं
बस दौड़ना और थकना मेरे दो जागीर यही

लेकिन तुम्हारे कदमो की नजाकत ने
हमें रुकने पे मजबूर कर दिया
ये चेहरा तुम्हारा इतना नूरानी
के हमें तमाम आरज़ू से भर दिया
तोह अगर तुम रूक जाओ साथ, मेरी जान
तुम्हारे साँसों में भर देंगे लज़्ज़त-ए-पैमान

पर यह अरमान पूरे होने का आसार नजर ना आये
बर्फ हो जाता है जिस्म , जहन मेरा हर लम्हा घबराये
जो आगाज़ किया उसको मुकाम पे पहोचा ना पाऊं
अपनी खुदगर्ज़ी के जश्न में तुम्हे रुस्वा ना कर जाऊं

पर इतना सोचना अभी गुनाह सा लगे
इक चिंगारी से तपिश की उम्मीद क्यों जगे
हम सबर के साथ मुनासिब वक़्त का इंतज़ार करेंगे
और तब तक मेरी जान इक तरफ़ा प्यार करेंगे
और यकीं मानो तुम्हे मेरे तड़प का वास्ता भी ना होगा
कायनात है गवाह मेरे मंज़िल का रास्ता यही होगा ….

 

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Shobhit Mishra
Perpetually lost in the ocean of exploration
Lives a life in denial to surface someday

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