दास्तां

दास्तां

लेके गया था नफ़रत, जब मिलने उससे गया था मैं,
उसने एक बार मुस्कुराके, मुझे फिर बेबस कर दिया…!!!

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Shivam Nahar
कलम तो मैं कब की उठा के रख देता, मगर तुम हो कि किस्से मुख्तसर नहीं होने देंती...!!!

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