मीरा

मीरा

मनभावन सी कोई,जो जागी न सोई, बस कान्हा की याद में मीरा ऐसी थी खोई…!!!
बस माला में रमती,उसके नाम को जप्ती,अपनी भक्ति की शक्ति से मेघ मल्हार बरसाती..!!

वो झूमे जब ज़ोर में,यूँ भक्ति के शोर में,
काले बादल हो घंघोर जो,जुड़ी रहती है डोर जो,
फिरती है ढूंढती खुद में,वो उसके निशां,
हर ओर वो तलाशे हरि,ढूंढे हैं तुझमें सारा जहां..!!!

वो मग्न उस सितार धुन में,गीत ऐसे गाये रे,
हर संगीत में अपने बस तुझको ही बुलाये रे,
वो दिन रैन, तके तेरे नैन,
मिल के हरि उसे,तू देदे चैन…!!!

सीरत को लुभावे तेरी,सूरत न देखे है खुद की,
मतवाली सी बावली,दिल को अपने खोये है,
मन मस्त मगन, ढूंढे तेरा संग,
हर बार चाहे वो हरि तेरो रंग…!!!!

वो स्नेह की डोर बाने तोसे जो जोड़ी,
सब मोह-माया संसार की खुद से है तोड़ी…!!!!

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Shivam Nahar
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