मै डरता हूँ हार जाने से

मै डरता हूँ हार जाने से

आँख खुली है लेकिन मै सो रहा हूँ,
सो रहा हूँ एक अँधियारे में,
डर ने मुझे घेर लिया है,
मै डरता हूँ हार जाने से।

कही रास्ता हो तो मुझे भी छुपकर निकलना है,
सवाल होंगे नज़रे मिलाने से,
अपनों ने मुझे घेर लिया है,
मै डरता हूँ बतियाने से।

रात का अकेलापन मधुर संगीत सा है,
कैसे रोकू चंद्रमा को ढल जाने से,
वक़्त की ओट में छिपा है कल मेरा,
मै डरता हूँ सूरज के आने से,

सोचता हूँ लिख दूँ यही पैगाम मौत का,
कलियाँ मुरझा जाएगी चले जाने से,
कही तो मेरी भी इबादत लिखी ही होगी,
मै डरता हूँ वही पन्ना खो जाने से।

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ShashAnk VyAs

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