मानव को पुनः सजाना है…🙏🏻

मानव को पुनः सजाना है…🙏🏻

मन सरल सरस चंचल निर्मल,

     विद्यालय की मैं शान बनू…

दुनिया को देकर ज्ञान दान,

     मै सुधी विज्ञ इंसान बनू…

 

दे ब्रहम ज्ञान ब्रह्माण्ड ज्ञान,

    नूतन कर्तव्य समारोह मे….

वैभव की सब निधियां बटोर,

   सुखमय संसार निहारु मै…

 

ना रहे  कठिन दुष्कर कोई,

   सब ढूंढ सरल से बाँध सकूँ…

खाई सीमा का बंधन क्या??

   मै वारिधी को भी लांघ सकूँ…

 

लेहार संस्कृति का फिर से,

    मानव को पुनः सजाना है…

हर अंतस मे हो विशव प्रेम,

    ये बीड़ा अभी उठाना है…

    ये बीड़ा अभी उठाना है…

Sneha Saxena

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Sneha Saxena
Intern at Quaff media pvt ltd. I like to enjoy my life and express them via writting. singing&doing social work is my hobby and i enjoy doing it.

19 Comments

    • Sneha Saxena

      hahahaha i wish to surprise u more in future keep waiting for my next post amrisha 😀

    • Sneha Saxena

      agree hona bnta h kyuki कविता को पढ़ने का मज़ा तब तक नही आता जब तक उसको पढ़ने से भाव उत्तपन न हो

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