माता

माता

पावन कोमल निर्मल, शीतल जैसे शाम धले।

याद तुम्हारी आती मन में , आसु पलक तले।

जीवन भर ममता छल्काति, मुझे प्यार से गले लगाति।

तुलसी के चौरा पर गाती, चंदा लोरि बैठ सुनाती।

आन्चल की छाया में तेरे, मधुरिम् प्यार पले।

याद तुम्हारी आती मन में , आँसू पलक तले।

दीन दुखी को दिया सहारा, अन्धकार से उन्हें उबारा।

पाकर के आशिश् तुम्हारा, सफल हुआ अभियान हमारा।

इस जीवन के मन मंदिर में , जगमग् ज्योति जले।

याद तुम्हारी आती मन में , आँसू पलक तले।

पावन् कोमल निर्मल, शीतल् जैसे शाम धले।

याद तुम्हारी आति मन में , आंसू पलक तले।

               

             

 

 

 

 

 

 

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Ria Mishra
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