VOICE OF INNER SOUL

VOICE OF INNER SOUL
इक रोज जब ढूंढना जिन्दगी के कुछ अनसुलझे सावालो को तुम,
शायद कही जवाब बनकर, मैं  फिर तुम्हें मिल जाऊँ ।
 
इक रोज जब थक जाओ जिन्दगी की भाग दौड़ से तुम,
शायद कही सूकून के लम्हों में, मैं  फिर तुम्हें मिल जाऊँ ।
 
इक रोज जब ऊब जाओ दुनिया के दिखावे से तुम,
शायद कही जीवन की सादगी में,मैं  फिर तुम्हें मिल जाऊँ।
 
इक रोज जब खुद को रिश्तो की भीड़ में भी अकेला पाओ तुम,
शायद कही सच्चे साथ में, मैं  फिर तुम्हें मिल जाऊँ ।
 
इक रोज जब अल्फाज भी ना समझ पाये कोई तुम्हारे,
शायद कही “खामोशी को भी पढ़ लेने वाले” एहसास में , मैं  फिर तुम्हें मिल जाऊँ ।
 
इक रोज जब सारे सपने बिखरे बिखरे नजर आये तुम्हें,
शायद कही आखरी उम्मीद में, मैं  फिर तुम्हें मिल जाऊँ ।
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Mohini Mishra
Technology is my passion, whereas literature is my love.
|| Chemical Researcher || IITian || Literature lover|| Avid reader|| soul of writer||

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