मेरे खत्म मोड़ की

फिर से शुरूआत कर ने क्यों

जमाने से लड़े तू

क्यों मेरी आँखों के आँशु को

पानी में बदलने की खातिर

क्यों तकलीफों से लड़े तू

भार मेरी नारंग ज़िंदगी का

क्यों अपनी बेशुमार पलों से भरे तू

अब ख़बर हुई तुम्हारी इस खैरियत की

मोहोब्बत है शायद इस नाचीज़ से तुम्हे

जिस ख़ातिर अपने हिस्से की खुशियों 

का मालिक भी मुझे करे तू