समा शब से पहले.

समा शब से पहले.

“समा शब से पहले “ शब से पहले कुछ रंग यूँ है बिखरते, मानो उडेल दी गयी हो, चित्रकार की रंग पटिया. शब से पहले सुगंध यूँ है बिखरती, मानो चुरा लिया गया हो, भवरे से रस. शब से पहले हया यूँ है बिखरती, मानो पर्दानशीं ना किया गया हो, नूरी का नूर. शब से पहले अमन यूँ है बिखरती, मानो रूबरू हो गया हो, खुद से खुद. शब से पहले ठंड यूँ है बिखरती, मानो हवाओं संग बह गया हो, हिमालय का कारवाँ.                         – यश...

Once Again

Once again I wanna meet you Once again I wanna teace you Once again I wanna love you Once again I wanna meet you wanna love you once again……. Once again , once again , once again …………… Please god give me that much strength That I can take her back to me No one can stop me No body can stop me Once , once , once ,……….. (6) Again , again , again ,……… (6) I wanna meet you I wanna love you I wanna teace you I wanna meet you wanna love you once again……… Once again , once again , once again ……… (4) I ….. I love her very much She …..she love me very much Then why …… why God why You did this with us Once , once , once ,. …….. (6) Again , again , again ……… (6) I wanna gain her She wanna gain me I wanna meet her wanna love her once again……. Once again , once again , once again …….. (4) They took her with them I wanna take my revenge God please help me Now I wanna kill them They , they , they , Are , are , are , Gone , Gone , Once again , once again , once again ……… Now once again I will meet you Now once again I will love you Now once again I will teace you Now once I will meet you I will meet you once again Once again , Once again , once again...

Meri Kalam se

Isse pehle ki mujhe chhod kar jaao ab tum.. Mere hisse ke aansu bha to lene do.. Tum aai hi kb thi sath me rhne ke liye.. Magar ab ho to jra muskura to lene do..!!
एक बाज़ार ऐसा भी.

एक बाज़ार ऐसा भी.

चलो ले चलूं उस बाज़ार मे. जहाँ चीजें कीमत से बड़कर एक सौगात होती हैं, यहा के हर रंग मे अपनी एक बात होती है. वसन रंगरेजी ना भाये तुम्हे यहा की, रंगीनो चमक ना दिखे यहा है,  यहा के हर ताग मे गार्मी की बात होती है. बने यही ये बिके यही पे, आज सजे यहा कल कही दिखे और है, यहा हर हाथ से बुनी जाल मे स्नेह की बात होती है. कहीं दूर नहीं अपने भीतर ही है ये बाज़ार, जहाँ रिश्तों की भी कुछ बात होती है. –...

एक लम्बे अंतराल के बाद।

एक लम्बे अंतराल के बाद आज कुछ लिखने की चाह है, हर वक्त हर लम्हा मेरे लिए एक नई राह है, सूरज की हर नई किरण में देख रहा कोई आस है, आज फिर से लगता है किसी भूखे का मन उदास है, चाहता हूँ मेरी कलम से निकले हर शब्द तीर की तरह, छलनी करे मानवता के दुश्मनों को किसी वीर की तरह, हर वक्त ये ज़िन्दगी लेती रहती है कोई इम्तिहान, सफलता को बस मन में लेना होता है ठान, आगे बढोगे तो ठोकरें भी खानी होंगी, उन ठोकरों को खा कर एक नई राह बनानी होगी, फिर मन में एक हौसला बनाना होगा, विफलता को भी एक शुरूआत बनाना...

Life

Zindagi koi Sangharsh nahi.