एक बाज़ार ऐसा भी.

एक बाज़ार ऐसा भी.

चलो ले चलूं उस बाज़ार मे. जहाँ चीजें कीमत से बड़कर एक सौगात होती हैं, यहा के हर रंग मे अपनी एक बात होती है. वसन रंगरेजी ना भाये तुम्हे यहा की, रंगीनो चमक ना ... Read More

एक लम्बे अंतराल के बाद।

एक लम्बे अंतराल के बाद आज कुछ लिखने की चाह है, हर वक्त हर लम्हा मेरे लिए एक नई राह है, सूरज की हर नई किरण में देख रहा कोई आस है, आज फिर से लगता है किसी भूख... Read More

Hum dono

Aj vo vaha gum hai Jaha hum bhi kabi khoye theAj bheegi h aanke unki aaiseJaise toot k hum roye the; Hume sambhala tha jisne Aj uneh humari zarurat si hKai... Read More

देशवासियो की छोटी मानसिकता

आज हमारे देशवासियो की आदत बन चुकी है दिखावा करने की , लगता है जैसे राजनीती तो हम सब के खून में घुल गयी है । जब भी किसी शहीद का जन्म दिवस या पुण्यतिथि आती ह... Read More

क्यूँ पूजते मुझे?

क्यूँ पूजते मुझे?

मेरी रूह कांपे दुनिया की सोच से, मैं झुकती जाऊँ दुनिया के बोझ से, अरमानों की दुनिया मे ऐसी मैं अकेली खड़ी। मैं बिखरती जाऊँ पतझड़ के जैसे इक पेड़ जैसे क्यो... Read More

Register or Login to start writing for Writm and connect with fellow students or Login with email ... Read More

Register or Login to start writing for Writm and connect with fellow students ... Read More